देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
बालापन में ज्ञान नहीं था, जवानी में ओडया खासा।2
काल बलि का लगा झपट्टा, तेरी हुई सांस में सांसा।।2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
जीवे इतने माता रोवे, बहन रोए दश मासा।2
तेरा दिन तेरी तिरिया रोवे, फिर करें घर वासा।।2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
भुजा पकड़ तेरा भाई रोवे,शीश पकड़ तेरी माता।2
चरण पकड़ तेरी तिरिया रोवे, छोड़ चला क्यों नाता।।2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
डोडी तक तेरी तिरिया का नाता,
फलसे तक तेरी माता।
मरघट लग ये लोग नगर के,
फिर हंस अकेला जाता।।2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
हाड जले जो लाकड़ी, भई केश जले ज्यो घासा।2
सोनी जैसी काया जल गई, कोई ना आवे पासा।।2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
धरा ढ़कया तेरा सारा ए रह गया, जिसकी लारा था आशा।2
कहे कबीर है सुनो भाई साधो यह दुनिया का रासा।
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
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