मन मानसरोवर मेल रे भवसागर से पार उतारे,
वो अगम अगोचर खेल रे।
सरवन बिना शब्द एक सुनिए,
पर खोताही बलेल रे।
गगन मंडल में ध्यान धरो रे, दीपक है बिन तेल रे।।
चारों युग में संत पुकारे,
कुक रहा हम हेल रे।
हीरे मानिक मोती बरसे,
यह जग चुगता डेल रे।।
चारों युग में संत पुकारे,
कुक रहा हम हेल रे।
हीरे मानिक मोती बरसे,
यह जग चुगता डेल रे।।
पांच पच्चीस तीन पर तकिया,
यो मन सुन सकेल रे।
बंध बांध लें बुद्धि का बंदो,
भवजल नोखा पेल रे।।
बारु जैसी गांठ बंधी है,
यो नर समझो मूढ़ बलेल रे।
लकी करोड़ी भये जगत में,
संग ना चाल्या डेल रे।
बारु जैसी गांठ बंधी है,
यो नर समझो मूढ़ बलेल रे।
लकी करोड़ी भये जगत में,
संग ना चाल्या ढेल रे।।
हस्ति, घोड़े अस्तपाल की ताजी घाल हमेल रे।
सुवरे हो के सीस कटावे,
लावत है मन सेल रे।
एक पुनी एक पापी आया,
एक है सुम दलेल रे।।2
गरीबदास एक सतनाम बिन।
सब ही जम की जेल रे।।
एक पुनी एक पापी आया,
एक है सुम दलेल रे।
गरीबदास एक सतनाम बिन।
सब ही काल की जेल रे।।
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