Tuesday, 12 February 2019

नशा नाश करता है।


आज के युवाओं 

में नशे के सेवन का प्रचलन बहुत ज्यादा देखने को मिलता है। वह शराब, गुटखा , सीगरेट आदि नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। युवाओं का जीवन अंधकार में है। नशे में रहने वाला व्यक्ति अस्थाई रूप से असंवेदनशील रहता है। जिस व्यक्ति को नशे की लत लग जाती है वह अपनी पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक छवी को खो बैठता है। आज के युवा नशा करने को फैशन और बड़े गर्व की बात समझते हैं। नशे में धुत व्यक्ति अपने ही घर में चोरी तक कर बैठते हैं। नशा बहुत से संगीन अपराधों को जन्म देता है।युवाओं और देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए लोगों को नशे के जाल से निकालना होगा। इसके लिए बहुत से नशा मुक्ति केंद्र भी खोले गए हैं। टीवी, पत्रिका आदि के माध्यम से लोगों को नशे से होने वाली हानियों के प्रति जागरूक करना होगा। नशा कर रहें लोगो और नशीले पदार्थ खरीदने और बेचने वालों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। देश को नशा मुक्त करने के लिए परिवार, समाज और देश को मिलकर कोशिश करनी होगी और नशे में फँस चुके व्यक्ति को प्यार और सहानुभूति से ही नशे से मुक्ति दिलानी होगी।





आज के आधुनिक समस में लोग नशा करने के आदि होते जा रहें हैं। वह शराब, सिगरेट, तंबाकू, चरस आदि नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। नशे ने हमारे पूरे देश को घेर लिया है और लोगों की जिंदगी में अंधकार कर दिया है। ज्यादातर नशे का सेवन युवाओं में देखा जाता है क्योंकि वह विदेशों की संस्कृति को अपनाना चाहते हैं। वह नशा करने को फैशन समझते है और गर्व महसूस करते हैं। नशे के वजह से देश के युवा अंधकार में है और देश का भविष्य भी सुरक्षित नहीं है।
नशा करने वाला व्यक्ति अपना मान सम्मान सब कुछ खो देता है। वह अपनी पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को खराब कर लेता हैं। नशे की लत में पड़कर यह लोग पहले धन देकर नशीले पदार्थ खरीदते हैं। बाद में घर के सामान आदि भी बेचने लगते है। नशे की लत में पड़ा हुआ मनुष्य अस्थाई रूप से असंवेदनशील हो जाता है। नशे की लत के चलते लोग बहुत से अपराधों को भी अंजाम देते हैं। वह चोरी छिपे भी विदेशों से नशीले पदार्थ मंगवाते है। नशा बहुत सी गंभीर बिमारियों को जन्म देता है। इसकी वजह से लीवर और अमाशय कमजोर होता है। कैंसर जैसी गंभीर बिमारियाँ भी इसी से उत्पन्न होती है।
लोगों को नशे से मुक्त करना उनके और देश के भविष्य के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके लिए बहुत से नशा मुक्ति केंद्र भी खोले गए है। देश को नशा मुक्त बनाने के लिए हमें और सरकार को मिलकर प्रयास करना होगा। लोगों को नशे से होने वाली हानियों के बारे में जागरूक करना होगा। संचार माध्यम जैसे की टीवी, अखबार और पत्रिकाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। नशीले पदार्थों का आयात भारत में बंद किया जाना चाहिए।





नशे की लत धीरे-धीरे लोगों में बढ़ती जा रही है लेकिन संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने से उनका सत्संग सुनने से व्यक्ति की बुरी लत अपने आप कुछ ही दिनों में छूट जाती है जैसे ही व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज जी से उपदेश लेते हैं उनकी करना शराब पीना बुरी लते छूट जाती है नशे के कारण व्यक्ति का शरीर खराब होता ही है उसके साथ साथ घर में भी कलह क्हहेेश हमेशा रहता है उनके परिवार वाले उनसे बहुत परेशान रहते हैं और घर में खुशहाली आ जाती हैं। संत रामपाल जी महाराज के लाखों अनुयाई है वह कोई भी नशा नहीं करते हैं किसी भी प्रकार की कोई भी बुराई नहीं करते हैं



  • तर्ज:- मिलो ना तुम तो हम घबराए मिलो तो आंख चुराएं हमें क्या हो गया है…….
  • नशा न करना मेरे भाई,नशे में आग लगाई,संभल जाओ मेरे भाई।संभल जाओ मेरे भाई।
  • नशा पाप का सगा हैं भाई,सच देता नहीं दिखाई,संभल जाओ मेरे भाई।संभल जाओ मेरे भाई।कुछ ना मिलेगा तुमको,पीकर शराब गुटका खाने से,
  • घर वाले भी तुमको,रोक देंगे से में घर आने से,कहीं सड़क पर सोना होगा तुमको बिना चटाई संभल जाओ मेरे भाई,संभल जाओ मेरे भाई,नशा न करना…………
  • हाथ में बोतल लेकर,चलते हो नागिन जैसी चाल हैं,कपड़े फटे हैं इनके,बिखरे हुए से देखो बाल है ,कोई ना अब पहचाने तुमको हालत कैसे बनाई संभल जाओ मेरे भाई,संभल जाओ मेरे भाई,नशा न करना…………
  • काम धाम कुछ कर लो,कैसे चलेगा घर महंगाई में,बच्चे क्या सोएंगे भूखे,अब किट-किट और लड़ाई मेंबच्चे हैं बुखार में तपते,तुम लाते नहीं दवाई।संभल जाओ मेरे भाई।संभल जाओ मेरे भाई ।नशा न करना………..

Monday, 11 February 2019

करवाचौथ

#karvachoth

करवा चौथ का व्रत कुछ ही सालों में चलन में आया है पहले के बुजुर्ग तो इसमे समझते ही नहीं थे,,  लेकिन 21वीं सदी में भी खूब पाखंड ने जन्म लिया है जबकि धर्म गुरुओं की बाढ़ सी आई हुई है जब हमारे शास्त्र व्रत करने को मना कर रहे हैं फिर यह करवा चौथ व्रत कहां से प्रारंभ हो गया सूक्ष्म वेद मैं करवा चौथ का व्रत करने वाली आत्मा गधी बनती है अगले जन्म में ,,और भूखा मरना पति की आयु नहीं बढ़ाता है कई महिलाएं करवा चौथ के दिन ही विधवा हो जाती है फिर वह करवा चौथ कहां काम आयाlhttps://news.jagatgururampalji.org/gallery/

Sunday, 10 February 2019

दहेज :एक कुप्रथा

दहेज प्रथा आज के युग में एक बुराई का रूप धारण कर चुकी है। आज के समय में दहेज प्रेम पूर्वक देने की नहीं बल्कि अधिकार पूर्वक लेने की वस्तु बनता जा रहा है। आधुनिक युग में कन्या को उसकी श्रेष्ठता और शील-सौंदर्य से नहीं बल्कि उसकी दहेज की मात्रा से आँका जाता है।

आज के समय में कन्या की कुरूपता और कुसंस्कार दहेज के आवरण की वजह से आच्छादित हो गये हैं आज के समय में खुले आम वर की बोली लगाई जाती है। दहेज में राशि से परिवारों का मुल्यांकन किया जाता है। पूरा समाज जिसे ग्रहण कर लेता है वह दोष नहीं गुण बन जाता है।
इसी के परिणाम स्वरूप दहेज एक सामाजिक विशेषता बन गयी है। दहेज प्रथा जो शुरू में एक स्वेच्छा और स्नेह से देने वाली भेंट होती थी आज वह बहुत ही विकट रूप धारण कर चुकी है। आज के समय में वर पक्ष के लोग धन-राशि और अन्य कई तरह की वस्तुओं का निश्चय करके उन्हें दहेज में मांगते हैं और जब उन्हें दहेज मिलने का आश्वासन मिल जाता है तभी विवाह पक्का किया जाता है।
इसी वजह से लडकी की खुशी के लिए लडके वालों को खुश करने के लिए ही दहेज दिया जाता है। आज के समय में लोग धन का हिसाब लगाते हैं कि इतने सालों से हर महीने का कितना रुपया जमा होगा।समाज में विकास और सामाजिक जीवन की शुरुआत के लिए विवाह को एक पावन और अनिवार्य बंधन के रूप में स्वीकार किया गया है। वैवाहिक जीवन में नर-नारी एक-दूसरे के पूरक बनकर जीवन को और मधुर बनाते हैं और भारतीय संस्कृति में जो पितृ ऋण होता है उसे वंश वृद्धि के रूप में बढ़ाते हैं।
एक पुरुष के जीवन में स्त्री शीतल जल की तरह होती है जो उसके जीवन को अपने प्यार और सहयोग से सुखी और शांतिपूर्ण बनाती है। लेकिन आज भारत के समाज में जो अनेक कुरीतियाँ फैली हुई हैं वो सब भारत के गौरवशाली समाज पर एक कलंक के समान हैं।

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जाति, छूआछूत और दहेज जैसी प्रथाओं की वजह से ही विश्व के उन्नत समाज में रहने पर भी हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। समय-समय से कई लोग और राजनेता इसे खत्म करने की कोशिश करते रहते हैं लेकिन इसका पूरी तरह से नाश नहीं हो पाया है। दहेज प्रथा दिन-ब-दिन और अधिक भयानक होती जा रही है।


















(यह एक बुराई है)
दहेज प्रथा आज के युग में एक बुराई का रूप धारण कर चुकी है। आज के समय में दहेज प्रेम पूर्वक देने की नहीं बल्कि अधिकार पूर्वक लेने की वस्तु बनता जा रहा है। आधुनिक युग में कन्या को उसकी श्रेष्ठता और शील-सौंदर्य से नहीं बल्कि उसकी दहेज की मात्रा से आँका जाता है।
आज के समय में कन्या की कुरूपता और कुसंस्कार दहेज के आवरण की वजह से आच्छादित हो गये हैं आज के समय में खुले आम वर की बोली लगाई जाती है। दहेज में राशि से परिवारों का मुल्यांकन किया जाता है। पूरा समाज जिसे ग्रहण कर लेता है वह दोष नहीं गुण बन जाता है।
इसी के परिणाम स्वरूप दहेज एक सामाजिक विशेषता बन गयी है। दहेज प्रथा जो शुरू में एक स्वेच्छा और स्नेह से देने वाली भेंट होती थी आज वह बहुत ही विकट रूप धारण कर चुकी है। आज के समय में वर पक्ष के लोग धन-राशि और अन्य कई तरह की वस्तुओं का निश्चय करके उन्हें दहेज में मांगते हैं और जब उन्हें दहेज मिलने का आश्वासन मिल जाता है तभी विवाह पक्का किया जाता है।
इसी वजह से लडकी की खुशी के लिए लडके वालों को खुश करने के लिए ही दहेज दिया जाता है।आज के समय में लोग धन का हिसाब लगाते हैं कि इतने सालों
से हर महीने का कितना रुपया जमा होगा।













दहेज प्रथा के दुष्परिणाम : दहेज प्रथा की वजह से ही बाल विवाह, अनमेल विवाह, विवाह विच्छेद जैसी प्रथाओं ने फिर से समाज में अपना अस्तित्व स्थापित कर लिया है। दहेज प्रथा की वजह से कितनी बड़ी-बड़ी समस्याएं आ रही हैं इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता है।
जन्म से पहले ही गर्भ में लडकी और लडकों की जाँच की वजह से लडकियों को गर्भ में ही मरवा देते हैं जिसकी वजह से लडकों और लडकियों का अनुपात असंतुलित हो गया है। लडकियों के माता-पिता दूसरों की तरह दहेज देने की वजह से कर्ज में डूब जाते हैं और अपनी परेशानियों को और अधिक बढ़ा देते हैं।
लडके वाले अधिक दहेज मांगना शुरू कर देते हैं और दहेज न मिलने पर नवविवाहिता को तंग करते हैं और उसे जलाकर मारने की भी कोशिश करते हैं। कभी-कभी लडकी यह सब सहन नहीं कर पाती है और आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाती है या फिर तलाक देने के लिए मजबूर हो जाती है।
दहेज न होने की वजह से योग्य कन्या को अयोग्य वर को सौंप दिया जाता है। जो कन्याएं अयोग्य होती हैं वे अपने धन के बल पर योग्य वरों को खरीद लेती हैं। माता-पिता अपने बच्चों की खुशी के लिए गैर कानूनी काम भी करने से पीछे नहीं हट पाते हैं। आज के समय में लडकों और लडकियों की खुले आम नीलामी की जाती है।
दहेज प्रथा का समाधान : अगर दहेज प्रथा को खत्म करना है तो उसके लिए खुद युवकों को आगे बढना चाहिए। उन्हें अपने माता-पिता और सगे संबंधियों को बिना दहेज के शादी करने के लिए स्पष्ट रूप से समझा देना चाहिए। जो लोग नवविवाहिता को शारीरक और मानसिक कष्ट देते हैं युवकों को उनका विरोध करना चाहिए।
ऐसे करवाते  है रमैनी(शादी)


दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी ने एक बहुत सराहनीय कदम उठाया है वह अपने सभी अनुयायियों की, जो भी शादी करना चाहते हैं उनकी दहेज मुक्त शादियां करवाते हैं और अपने अनुयायियो को यही शिक्षा देते हैं कि ना ही हमें दहेज देना है और ना ही हमें दहेज लेना है।


 संत रामपाल जी महाराज की इस नई पहल से समाज सुधार हो रहा है और इस तरह से बहुत ही आसान तरीके से शादी हो जाती हैं और वह खुशी खुशहाल जीवन जीते हैं।

जिसने तेरी रक्षा जठराग्नि में की वह है पूर्ण परमात्मा वह है समरथ साहेब।

जिसने तेरी रक्षा जठराग्नि में की वह है पूर्ण परमात्मा वह है समरथ साहेब।  मां के कोख में जहां बच्चा पलता है वहां उसकी कोई और रक्षा नही...