Saturday, 11 July 2020

जिसने तेरी रक्षा जठराग्नि में की वह है पूर्ण परमात्मा वह है समरथ साहेब।


जिसने तेरी रक्षा जठराग्नि में की वह है पूर्ण परमात्मा वह है समरथ साहेब।

 मां के कोख में जहां बच्चा पलता है वहां उसकी कोई और रक्षा नहीं कर सकता। जेठराग्नि बहुत अधिक गर्म होती है। हम कच्चा पक्का खाना बनाकर खाते हैं उस खाने को जठराग्नि और अधिक पकाकर उसमें से पोषक तत्व और अन्य तत्व सभी अलग-अलग करती है। अंदर एक फैक्ट्री है जहां बहुत काम चलता है जिसकी गर्मी से परमात्मा ही शिशु को बचाते हैं और शिशु को उसकी गर्मी भी महसूस नहीं होती है, परमात्मा शिशु को आंच तक नहीं आने देता है तो जिस प्रकार परमात्मा ने जठराग्नि में तेरी रक्षा की है वह है पूर्ण परमात्मा।
उस परमात्मा की तू भक्ति कर। अन्य आन उपासना को त्याग दें विश्व में सच्चे संत संत रामपाल जी महाराज ही है।

Friday, 10 July 2020

चतुर प्राणी और मूर्ख प्राणी किसे कहते हैं

चतुर प्राणी और मूर्ख प्राणी किसे कहते हैं 

यह दोनों प्रकार के इंसान सच्ची भक्ति से दूर रहते हैं सच्ची भक्ति नहीं कर सकते।

जो सद भगति नहीं करते हैं वह मूड होते हैं गीता में बताया है जो मनुष्य ज्ञान को जानकर भी सद्भक्ति नहीं करता है वह मूर्ख है उसकी आंखों में मोतियाबिंद हो गया है जो परमात्मा के प्यारे बच्चे बुनियाद में होते हैं वह लोग सत्य ज्ञान को सुनकर उसे स्वीकार करते हैं और आजीवन सद्भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करते हैं।

चतुर प्राणी है जो गीता की आड़ लेकर लोगों को मूर्ख बनाते हैं और अपना धंधा चलाते हैं उनसे पैसे लेते हैं गीता की आड़ में गीता का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं देते हैं इधर उधर की कहानियां सुना देते हैं और लोग तालियां बजा देते हैं उन्हें चतुर प्राणी कहा गया है
 जो मन मुखी साधनाएं करवाते हैं। 



चतुर प्राणी चोर है मुड़ मुखड़ है थोठ। 
ये संतों के ना काम के, इनके दो गलजोट।।

मूड इंसान वह है जो सच्चा ज्ञान पाकर भी उसे समझ कर भक्ति नहीं करता है।

Thursday, 9 July 2020

देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा



देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
बालापन में ज्ञान नहीं था, जवानी में ओडया खासा।2
काल बलि का लगा झपट्टा, तेरी हुई सांस में सांसा।।2
 
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2

जीवे इतने माता रोवे, बहन रोए दश मासा।2
तेरा दिन तेरी तिरिया रोवे, फिर करें घर वासा।।2

देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2

भुजा पकड़ तेरा भाई रोवे,शीश पकड़ तेरी माता।2
चरण पकड़ तेरी तिरिया रोवे, छोड़ चला क्यों नाता।।2

देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2

डोडी तक तेरी तिरिया का नाता,
फलसे तक तेरी माता।
मरघट लग ये लोग नगर के,
फिर हंस अकेला जाता।।2

देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2

हाड जले जो लाकड़ी, भई केश जले ज्यो घासा।2
सोनी जैसी काया जल गई, कोई ना आवे पासा।।2

देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2
देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2

धरा ढ़कया तेरा सारा ए रह गया, जिसकी लारा था आशा।2

कहे कबीर है सुनो भाई साधो यह दुनिया का रासा।

देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा...2

Thursday, 7 May 2020

मन मानसरोवर मेल रे

मन मानसरोवर मेल रे भवसागर से पार उतारे,
वो अगम अगोचर खेल रे।
सरवन बिना शब्द एक सुनिए,
पर खोताही बलेल रे।
गगन मंडल में ध्यान धरो रे, दीपक है बिन तेल रे।।
चारों युग में संत पुकारे,
कुक रहा हम हेल रे।
हीरे मानिक मोती बरसे,
यह जग चुगता डेल रे।।
चारों युग में संत पुकारे,
कुक रहा हम हेल रे।
हीरे मानिक मोती बरसे,
यह जग चुगता डेल रे।।
पांच पच्चीस तीन पर तकिया,
यो मन सुन सकेल रे।
बंध बांध लें बुद्धि का बंदो,
भवजल नोखा पेल रे।।
बारु जैसी गांठ बंधी है,
यो नर समझो मूढ़ बलेल रे।
लकी करोड़ी भये जगत में,
संग ना चाल्या डेल रे।
बारु जैसी गांठ बंधी है,
यो नर समझो मूढ़ बलेल रे।
लकी करोड़ी भये जगत में,
संग ना चाल्या ढेल रे।।
हस्ति, घोड़े अस्तपाल की ताजी  घाल हमेल रे।
सुवरे हो के सीस कटावे,
लावत है मन सेल रे।
एक पुनी एक पापी आया,
एक है सुम दलेल रे।।2
गरीबदास एक सतनाम बिन।
सब ही जम की जेल रे।।
एक पुनी एक पापी आया,
एक है सुम दलेल रे।
गरीबदास एक सतनाम बिन।
सब ही काल की जेल रे।।



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Sunday, 19 April 2020

सच्चा सतगुरु | sacha satguru: Supreme Knowledge

सच्चा सतगुरु 




  • पवित्र वेदों व गीता जी आदि पवित्र सदग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तब परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परम संत यानी सच्चे सतगुरु को भेजकर सत्य ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनर्स्थापना करता है
         वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज द्वारा ही सत्य ज्ञान दिया जा रहा है।
  • श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है। यह तत्वज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं।
  • यजुर्वद अध्याय 19 मन्त्र 25 के अनुसार तत्वदर्शी संत वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है।ऐसा केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।
  • पूर्ण संत तीन प्रकार के मंत्रों को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ 265 पर बोध सागर में मिलता है। गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या 822 में मिलता है।संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत हैं जो तीन प्रकार के मंत्रों का तीन बार में उपदेश करते हैं।
  • सच्चा सतगुरु वही है जो गीता अध्याय 16 के श्लोक 23, 24 के अनुसार भक्त समाज को शास्त्र अनूकूल भक्ति साधना बताए। शास्त्र अनूकूल भक्ति साधना केवल संत रामपाल जी महाराज के पास ही मौजूद है।
  • सच्चा सतगुरु वो है जो हमारे सभी धर्मों के सदग्रन्थों से प्रमाणित ज्ञान व सतभक्ति देकर मोक्ष दिला दे।मोक्षदायक भक्ति केवल संत रामपाल जी महाराज के पास ही है।
  • पूर्ण गुरु जब सत्य ज्ञान का प्रचार करता है तो सभी नकली गुरु जनता द्वारा उसका विरोध करा देते हैं। जबकि पूर्ण गुरु का ज्ञान शास्त्र प्रमाणित होता है\
ये बातें संत रामपाल जी महाराज पर ही खरी उतरती हैं।




जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।
-पूर्ण संत रामपाल जी महाराज
पूर्ण गुरु समाज से जाति व धर्म का भेद मिटाता है।


  • आज तक किसी भी संत ने यह नहीं बताया कि श्रीमद्भगवत गीता जी का ज्ञान काल/ब्रह्म ने श्रीकृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके बोला था। यह भेद केवल पूर्ण संत रामपाल जी ने ही प्रमाण सहित बताया है।
  • वेद कतेब झूठे नाहि, झूठे हैं जो समझे नाहि।पूर्ण गुरु सभी सद्ग्रन्थों का ज्ञाता होता है। सद्ग्रन्थों की पूर्ण जानकारी केवल पूर्ण संत रामपाल जी महाराज के पास ही है।

  • नकली संत कहते हैं कि सद्भक्ति से पापकर्म नहीं कटते, भोगने ही पड़ेंगे। जबकि सच्चे गुरु संत रामपाल जी महाराज सभी शास्त्रों से प्रमाणित करके बताते हैं कि सद्भक्ति से पापकर्म कटते हैं और कैंसर क्या कैंसर का बाप भी ठीक होता है।
  • सच्चा सतगुरु अपने सत्य ज्ञान से स्वच्छ समाज का निर्माण करता है। संत रामपाल जी महाराज के नेतृत्व में पाखण्ड मुक्त, नशा मुक्त, दहेजमुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त समाज तैयार हो रहा है।


  • वह संत सभी धर्म ग्रंथों का पूर्ण जानकार होता है।वर्तमान में केवल सतगुरु रामपाल जी महाराज ही हैं जो सभी सद्ग्रन्थों के पूर्ण जानकार हैं, उनके द्वारा बताई गई भक्ति विधि भी पूर्ण रूप से शास्त्रों से प्रमाणित है।
  • संत गरीबदास जी के अनुसार पूर्ण संत की पहचान
  • पूर्ण संत तीन समय की पूजा बताता है। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताता है वह जगत का उपकारक संत होता है।वर्तमान में वह पूर्ण संत रामपाल जी महाराज ही है
  • कबीर साहिब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को बताते हैं कि जो मेरा संत सतभक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी संत व महंत झगड़ा करेंगे यह उसकी पहचान होगी।
  • जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावे।वाके संग सभी राड बढ़ावे।।
          यह सब बातें सच्चे सतगुरु रामपाल जी महाराज पर ही खरी उतरती हैं।
  • सच्चा सतगुरु वही है जिसके द्वारा बताई गई भक्ति विधि शास्त्र प्रमाणित हो। शास्त्र प्रमाणित भक्ति पूरे विश्व में केवल संत रामपाल जी महाराज के पास ही है।
  • सच्चा सतगुरु वो है जो हमारे सभी धर्मों के सदग्रन्थों से प्रमाणित ज्ञान व सतभक्ति देकर जन्म-मृत्यु से छुटकारा दिला दे। सद्ग्रन्थों पर आधारित भक्ति केवल संत रामपाल जी महाराज ही बताते हैं।

 सतगुरु की पहचान संत गरीबदास जी की वाणी में -
”सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।“
पूर्ण संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा।
सभी सद्ग्रन्थों के पूर्ण जानकर संत रामपाल जी महाराज हैं जो सतभक्ति देकर मानव को सभी बुराइयों से दूर कर रहे हैं।
पूर्ण संत की पहचान

पूर्ण संत भिक्षा व चंदा मांगता नहीं फिरेगा।


*पवित्र सदग्रन्थों जैसे श्रीमद्भगवद गीता जी, वेद, गुरु ग्रंथ साहेब, बाइबिल, कुरान से कबीर साहेब जी को परमात्मा सिद्ध करने वाले संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण तथा सच्चे गुरु हैं।

*यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा करवाएगा। वह जगत का उपकारक संत सच्चा सतगुरु होगा।
इस परमार्थ के कार्य को केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।
*पूर्ण गुरु के लक्षण
पूर्ण संत सर्व वेद-शास्त्रों का ज्ञाता होता है।
दूसरे वह मन-कर्म-वचन से यानि सच्ची श्रद्धा से केवल एक परमात्मा समर्थ की भक्ति स्वयं करता है तथा अपने अनुयाईयों से करवाता है।
तीसरे वह सब अनुयाईयों से समान व्यवहार (बर्ताव) करता है।
चौथे उसके द्वारा बताया भक्ति
कर्म वेदों में वर्णित विधि के अनुसार होता है।
*कुरान ज्ञान दाता हजरत मुहम्मद जी को कहता है कि उस अल्लाह की जानकारी किसी बाख़बर इल्मवाले संत से पूछो।
वह बाख़बर इल्मवाले संत रामपाल जी महाराज हैं जो अल्लाह की सम्पूर्ण जानकारी रखते हैं।
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Tuesday, 14 April 2020

सतगुरु अपना साथी है

मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है सतगुरु अपना साथी है
वह तो हरदम साथी है
मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

गयाबन गऊ काट के डाली, कैसी करी ढ़ीठाई ।
कहे सिकंदर से जीवित कर दे तब मानू तेरी खुदाई।।2।।
गऊ बच्चा तत्काल जीवाई, फिर दूध दुहाती है ।
सतगुरु अपना साथी है।

मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है 
सतगुरु अपना साथी है
वह तो हरदम साथी है
मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है 
सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

इंद्र मति पर काल झपट्टा, सतगुरु करी सहाई।
कमाल कमली जीवित किनहै सत्य कबीर दुहाई।।2।।

सिकंदर की जलन बुझाई वह कहरामाती है 
सतगुरु हरदम साथी है।

मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है 
सतगुरु अपना साथी है
वह तो हरदम साथी है


बिजली खान पठान समझाया अब्राहिम सुल्तानी।।2
हिंदू राजा वीर सिंह ने सिख गुरु की मानी।
बेद कतेब कहे एक कहानी,
कोई जात न पाती है...

सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है 
सतगुरु अपना साथी है
सतगुरु हरदम साथी है।

वह तो हरदम साथी है
मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है 
सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

जो चाहे सो कर दे 
सतगुरु जो चाहे सो कर दे परमेश्वर पढ़ो ना कोई 
शेउ धर का शीश चढ़ाया,
 पाछे करी रसोई।।

सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है सतगुरु
सतगुरु हरदम साथी है।


मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है सतगुरु 
अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

जगत नाथ का मंदिर बचाया, समुंदर ने चढ़ाई।
साहेब कबीर के तेज के आगे,
फीका पड़ गया भाई।।2।।
विप्र रूप धर देई गवाही,
मेरी नहीं पार बसाती है।।

सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता
क्यों सताती है सतगुरु
सतगुरु अपना साथी है।
वह तो हरदम साथी है।

राज दरबार में साहेब कबीर ने पग पे डालिया पानी।
जगन्नाथ के पांडे के पैर की,
या पड़ेगी अगन बुझानी।
दूत भेजकर पूछी कहानी,
ज्यों की त्यों ही पाती है।


सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता,
क्यों सताती है सतगुरु 
सतगुरु अपना साथी है।
वह तो हरदम साथी है


उबलते तेल में बर्तन में डाले,
वो बंदी छोड़ कबीर।।2
शेख तकी कहे मंत्र के तेज से, इसने ठंडी करी तासीर।।

उंगली डाली ना सही पेड़ सिकंदर को मुरझा आ जाती है।।

सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता क्यों सताती है।
सतगुरु अपना साथी है।


साहेब कबीर को काटन चालिया,
वो शेख तकी जलील।
आर पार तलवार निकल जा,
फिर भी समझा नहीं खलील।।2।।

भाग गया ना लाई डील,
साहेब को हांसी आ जाती है।।

सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता 
क्यों सताती है सतगुरु 
अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

शेख तकी ने जुल्म गुजारे,
बावन करी बदमाशी,
खूनी हाथी आगे डालें 
वह बांध जुड़ अविनाशी।।2।।

हाथी डर से भाग जासी,
ये दुनिया गुण गाती है।।

सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता 
क्यों सताती है
सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

झूठा प्रचार किया किसी मूर्ख ने कबीर करे भंडारा। 
दो रोटी का साधन ना था,
भेख जुड़िया अति भारया।।2।।
बन आया केशव बंजारा
वह होता हीमाती है।


सतगुरु अपना साथी है
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता
क्यों सताती है।
सतगुरु हरदम साथी है।
वह तो हरदम साथी है।


जीवा दत्ता ने सूखे खूंट पर,
लई परीक्षा भारी ।
परमेश्वर कबीर के चरणामृत से,
हरी होगी वह सुखी डारी।।2।।

कबीर वट वो जाता पुकारी दुनिया देखन जाती है।

सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता,
क्यों सताती है।
सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

रविदास कबीरजी हाथी चढ़ चाले,
संग लेली गणिका माई।
गंगोदक शीशी में भर के,
मदिरा ज्यों पीवे भाई।।2।।

64 लाख ने भक्ति बहाई,
मूर्ख को नहीं प्रतीत आती है।

सतगुरु अपना साथी है 
सतगुरु हरदम साथी है 
मूर्ख मनवा काल की चिंता 
क्यों सताती है।
सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

गुरु रामदेवानंद जी ने दया करी,
प्याया राम नाम का प्याला। सत्यनाम का मंतर देकर,
यह किया ज्ञान उजियारा।।2।।

चरणों के मा रहे रामपाला,
अब भक्ति मन भाती है,

सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।
मूर्ख मनवा काल की चिंता 
क्यों सताती है।
सतगुरु अपना साथी है।
सतगुरु हरदम साथी है।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा

तो परमात्मा क्या बताते हैं।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।

यानी भक्ति नहीं करते उनके विषय में बता रहे हैं।

बिना भजन तेरी हुए दुर्गति,
तू पड़या पड़या पछताएगा।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।

भाई बचपन गया जवानी भी जाएगी।
फिर घना अंधेरा छावेगा।।2।
वृद्धावस्था तेरी गर्दन हाले,
तेरा सिर भी चक्कर खाएगा।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।

बिना भजन तेरी होवे दुर्गति,
तू पडा पड़ा पछतावे।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।

आंखों से तुझे देवे ना दिखाई,
तू खूब देखना चावेगा।।
आखो आगे जाला फिर जा,
जब हाथों नजर बनावेगा।।2।।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।

बिना भजन तेरी होवे दुर्गति,
तू पडीया-पडीया पछतावेगा।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।

भाई काना से तुझे देवे ना सुनाई, तू चौकस ध्यान लगावेगा।
भाई काना से तने देवें ना सुनाएं तू चौकस ध्यान लगावेगा।


भाई काना से तने देवें ना सुनाएं तू चौकस ध्यान लगावेगा।2
कान आंख से काम ना चाले,
फिर मू भी गेल्या बावेगा।

मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।
मन मान जा बुढ़ापा आवेगा।

जिसने तेरी रक्षा जठराग्नि में की वह है पूर्ण परमात्मा वह है समरथ साहेब।

जिसने तेरी रक्षा जठराग्नि में की वह है पूर्ण परमात्मा वह है समरथ साहेब।  मां के कोख में जहां बच्चा पलता है वहां उसकी कोई और रक्षा नही...