जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई ,धर्म नहीं कोई न्यारा।।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
इस संसार का काल है राजा,
यो राजा मायाजाल पसारया हो।।2।।
चौदह लोक इसके मुख में बसत है,
ये सबका करें आहारा हो ..2
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
चार बार कोयला कर डारे,
फिर फिर दे अवतारा हो।।2।।
ब्रम्हा, विष्णु, शिव तन धर आये,
फिर ओर का कौन विचारा हो।
ओर का कौन विचारा हो।2
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
सुर नर मुनि जन सब छल भल मारे,
चौरासी में डारिया हो।।2।।
मद आकाश आप जहाँ बैठिया,
वो जोत स्वरूपी उजियारा हो।
वो जोत स्वरूपी उजियारा हो।
चल हंसा उस लोक ,(सतलोक) हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
वाके पार एक ओर नगर है,
जहाँ बरसे अमृत धारा हो।।2।।
स्वेत स्वरूप फूल वहाँ फुले,
हंसा करत विहारा हो।
हँसा करत विहारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
कोटि सूर्य चंद्र छिप जावे,
जाके एक रूम चमकारा हो।।2।।
कहे कबीर सुनो धर्मदासा
वह देखो पुरूष दरबार हो।
वह देखो पुरूष दरबार हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
सत साहेब🙏🏻
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
इस संसार का काल है राजा,
यो राजा मायाजाल पसारया हो।।2।।
चौदह लोक इसके मुख में बसत है,
ये सबका करें आहारा हो ..2
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
चार बार कोयला कर डारे,
फिर फिर दे अवतारा हो।।2।।
ब्रम्हा, विष्णु, शिव तन धर आये,
फिर ओर का कौन विचारा हो।
ओर का कौन विचारा हो।2
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
सुर नर मुनि जन सब छल भल मारे,
चौरासी में डारिया हो।।2।।
मद आकाश आप जहाँ बैठिया,
वो जोत स्वरूपी उजियारा हो।
वो जोत स्वरूपी उजियारा हो।
चल हंसा उस लोक ,(सतलोक) हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
वाके पार एक ओर नगर है,
जहाँ बरसे अमृत धारा हो।।2।।
स्वेत स्वरूप फूल वहाँ फुले,
हंसा करत विहारा हो।
हँसा करत विहारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
कोटि सूर्य चंद्र छिप जावे,
जाके एक रूम चमकारा हो।।2।।
कहे कबीर सुनो धर्मदासा
वह देखो पुरूष दरबार हो।
वह देखो पुरूष दरबार हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
चल हंसा सतलोक हमारे, छोड़ो यह संसारा हो।
छोड़ो यह संसारा हो।
सत साहेब🙏🏻
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